Dr Niraj Kumar Yadav
MBBS, MS, FIOPS, FAICO, FICM, FID, NDEP
Ophthalmic Plastic & Facial Aesthetic Surgeon
Assistant Professor, Department of Ophthalmology
Dr KNS Memorial Institute of Medical

MBBS, MS, FIOPS, FAICO, FICM, FID, NDEP
Ophthalmic Plastic & Facial Aesthetic Surgeon
Assistant Professor, Department of Ophthalmology
Dr KNS Memorial Institute of Medical Sciences, Lucknow
National President, Indian Medicos Organization
👁 होली के त्योहार पर आंखों चेहरे का बचाव एवं सावधानियां। 👀
भारत देश में होली का त्यौहार हमेशा से रंगों के साथ मनाया जाता रहा है। होली में शामिल अनेक प्रकार के रंग त्योहार को खुशनुमा बना देते हैं। ऐसी प्राचीन काल से मान्यता रही है कि रंगों का यह त्यौहार लोगों के जीवन में अनेक प्रकार की खुशियां लेकर आता है। लेकिन यही रंग यदि आंखों में पड़ जाए और उसका समय पर तथा समुचित तरीके से इलाज न किया जाए तो व्यक्ति को अप्रत्याशित नुकसान हो सकता है। इसलिए होली खेलते समय सबसे जरूरी बात यह है कि आप सबसे पहले अपनी आंखों, चेहरे तथा बालों का विशेष ध्यान रखें। कृत्रिम रूप से बनाए गए रंगों में अनेक प्रकार के केमिकल पाए जाते हैं। यही केमिकल आंखों तथा चेहरे पर विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभाव डालते हैं। आपके चेहरे के इन महत्वपूर्ण हिस्सों पर रंगों की उपस्थित केमिकल से रक्षा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जो आपको जाननें आवश्यक है। आंखें हमारे शरीर का सबसे नाजुक अंग होती हैं अतः रंगों में पाए जाने वाले हानिकारक रसायनों का दुष्प्रभाव आंखों पर सबसे ज्यादा और जल्दी पड़ता है। यदि इसको समय रहते ठीक ना किया जाए तो आंखों की रोशनी पर दुष्प्रभाव पढ़ने लगता है। प्राचीन काल में लोग रंगों का निर्माण अनेक प्रकार के पुष्पों, फलों तथा सब्जियों से करते थे। प्राकृतिक रूप से बनाए गए रंगों से आंखों तथा चेहरे पर बहुत निम्नतम दुष्प्रभाव पड़ता था। लेकिन वर्तमान समय में कृत्रिम रंगों का निर्माण तथा उपयोग बहुत ही धड़ल्ले से हो रहा है जिस पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार द्वारा कोई स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। होली में रंगों से खेलते समय अपनी आंखों की समुचित देखभाल न करने से आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थायी अंधापन और त्वचा में संक्रमण की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही रंगों में मौजूद कुछ रसायन इतने हानिकारक हो सकते हैं कि भविष्य में इनसे अनेक प्रकार के त्वचा के कैंसर भी उत्पन्न हो सकते हैं।
इसलिए होली के रंगारंग त्यौहार में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इस पर हम क्या करें और क्या ना करें के रूप में प्रकाश डाल रहे हैं।
पुतली प्रत्यारोपण, लो विजन और रेटिना सर्जरी जैसी शल्य चिकित्साओं से बचने के लिए होली के दौरान आंखों की सुरक्षा करें और इन उपायों का पालन करें।
होली के समय क्या करें–
- होली खेलते समय आंखों में तथा आंखों के आसपास के रंगों को साफ पानी से लगातार धोते रहें। धोने की यह प्रक्रिया कम से कम 5 से 10 मिनट तक करनी चाहिए। जिसके परिणाम स्वरूप केमिकल का आंखों तथा त्वचा पर दुष्प्रभाव कम हो जाता है। आंखों को अच्छी तरह धोने के पश्चात नजदीकी नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। किसी के बताने या मेडिकल स्टोर से सीधे कोई भी आई ड्रॉप लेकर ना डालें।
- बाजार में कई अलग-अलग आई ड्रॉप्स उपलब्ध हैं, जिसमें एलर्जी को कम करने तथा आंखों को नम बनाने के रूप में ड्रॉप मुख्य रूप से उपयोग किए जाते हैं। लेकिन यह ड्रॉप हमेशा नेत्र रोग विशेषज्ञ के परामर्श के बाद ही प्रयोग करें। किसी भी आंख की एलर्जी से बचाव के लिए आप इन्हें अप्लाई कर सकते है। आई ड्रॉप के उपयोग से आपकी आंखों को खुजली और दर्द से राहत मिलेगी। इसलिए ध्यान रखें होली खेलने से पहले और बाद में एक-एक बूंद आई ड्रॉप का इस्तेमाल जरुर करें।
- आंखों को रंगों से बचने के लिए हम धूप के चश्में का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही साथ यदि कोई आपके चेहरे पर रंग लगा रहा है तो उस समय आप अपनी आंखों को बंद कर ले। सनग्लासेस की मदद से हमारी आंखें रंगों के अटैक और एलर्जी से बच पायेंगी। प्रोटेक्टीव आईवियर लगाना एक अच्छा उपाय है। होली खेलते समय इन्हें हटाने के बारे में कभी न सोचें। धूप का चश्मा, आंखों में जाने वाले रंगीन पानी या खतरनाक रंगो की उपस्थिति को भी रोकने का काम करेगा।
- अपनी आंखों तथा चेहरे को हानिकारक रंगों से बचाने के लिए चेहरे पर कोल्ड क्रीम का प्रयोग करें। कोल्ड क्रीम आंखों तथा चेहरे को होली के रंगों से बचाने का काम करती है। होली खेलने से पहले अपने चेहरे पर नारियल तेल से मालिश करें। क्रीम की तरह ही नारियल का तेल भी रंगों में मौजूद अनेक प्रकार के रसायनो को चेहरे तथा आंखों में जाने से रोकेगा।
होली के समय क्या ना करें-
- होली खेलते समय अपने चेहरे तथा आंखों को छूने और रगड़ने से बचें साथ ही अपनी आँखों और नाक को ढँकें रखें। आंखों में कुछ पढ़ने पर हमारी पहली प्रतिक्रिया यह होती है कि आपको रगड़ना या मलनें से परेशानी दूर हो जाएगी इसके विपरीत ऐसा करने से समस्या और गंभीर हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए हमेशा आंखों को एक ताजा रूमाल या कपड़े से ढंकने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके हाथ रंगो से सने व दागदार हो सकते हैं, और यह इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। इन गंदे हाथों की बदौलत केमिकल वाले रंग आपकी आखों में जा सकते हैं जिससे बाद में संक्रमण तथा अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। आंखों में पड़ा हुआ रसायन का टुकड़ा यदि रगड़ा जाता है तो पुतली पर घाव बन जाती है। जिससे बाद में अल्सर हो जाता है। और यही अल्सर बाद में संक्रमित होकर आंख की रोशनी को बुरी तरीके से प्रभावित करता है। अतः इस बात का ध्यान रखें की आंख को बिल्कुल भी रगड़ना नहीं है। यदि आंखों में रंग पढ़ने के पश्चात लाली बनी रहती है तो आप नजदीकी नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
- किसी के बताने या स्वयं से मेडिकल स्टोर जाकर कोई भी आई ड्रॉप ना ले और ना ही उसे आंखों में प्रयोग करें। प्रायः ऐसा देखा गया है कि मेडिकल स्टोर पर जो भी लोग होते हैं वह स्टेरॉयड आई ड्रॉप दे देते हैं। यदि आंखों में घाव या पुतली पर चोट लगी हो तो यह स्टेरॉयड आई ड्रॉप उसको और ज्यादा बढ़ा देती है। इसलिए स्वयं से आई ड्रॉप उपयोग न करें। आई ड्रॉप का उपयोग करते समय यह देख लें कि कही वो आई ड्रॉप एक्सपायर तो नहीं हो गई हैं। इसके अलावा आपको आंखों में स्टेरॉयड का उपयोग करने से भी बचना चाहिए। भले ही स्टेरॉयड तुरंत राहत देते हो, लेकिन भविष्य में यह लंबे समय के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकते है।
- होली के समय कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करने से बचें, विशेष रूप से लंबे समय तक प्रयोग में आने वाले कांटैक्ट लेंस बिल्कुल ना प्रयोग करें।
- पानी के गुब्बारे और जहरीले रंगों के उपयोग से बचें क्योंकि यह सीधे तौर पर आंखों में गंभीर क्षति पहुंचाते हैं। पानी के गुब्बारे आपकी आंखों को अनेक प्रकार की चोट पहुंचा सकते हैं जिसमें आंख में खून बहना, लेंस में उभार या डिसलोकेशन, मैक्यूलर एडिमा या रेटिना डिटेचमेंट हो सकता है। इस चोट से आपकी रोशनी कम या खत्म हो सकती है।
- होली में आंखों को खुला ना रखें। आंखों को खुला छोड़ने से निम्न प्रकार परेशानियां खड़ी हो सकती है जिसमें पलक का संक्रमण (Blepharitis), एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस (Allergic conjunctivitis), केमिकल बर्न्स (Chemical burns), कॉर्नियल एब्रेशन (corneal abrasion), आंख में ब्लंट टॉमा (Blunt trauma) इत्यादि। यदि खेलते समय आंखों में रंग पड़ गया है तो आप हाथ से आंखों को रगड़ने के बजाय गीले कपड़े को आंख पर रखें और जल्द से जल्द नजदीकी नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
अतः होली के दिन आंखों की देखभाल करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। क्योंकि यह शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा है और यह इसके प्रभावित होने से पूरा जीवन अंधकारमय में हो जाता है अतः हम सब होली खुलकर खेले लेकिन सारी सावधानियां और बचाव को ध्यान में रखकर खेलें।
होली के दौरान आँखों की रक्षा करें!
स्वस्थ होली, सुंदर होली, सुरक्षित होली।
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