रावण का सिरदर्द और 10 गोलियों का रहस्य

लंकापति रावण अपनी सोने की लंका में बड़े शान से राज कर रहे थे। एक दिन सुबह-सुबह, जब वह दरबार में पहुंचे, तो अचानक उनके माथे पर शिकन आ गई। उनके दसों सिर एक साथ टकराए और वह कराह उठे—

“अरे! यह सिरदर्द क्यों हो रहा है?”

मंत्रीगण चिंतित हो गए। रावण के सिरदर्द का मतलब था पूरे लंका में हड़कंप! वैद्यराज तुरंत बुलाए गए।

“राजन, आपको बहुत तेज सिरदर्द है! दवा लेनी होगी!” वैद्य ने कहा।

रावण गुस्से में बोले, “तो दो ना दवा! लेकिन ध्यान रहे, सभी सिरों को राहत मिलनी चाहिए!”

वैद्यराज सोच में पड़ गए। आम आदमी के लिए तो एक गोली काफी होती, पर रावण के लिए? उनके पास कुल दस सिर थे। उन्होंने जल्दी से एक पर्चा निकाला और उसमें लिखा—

“रावण को सिरदर्द की 10 गोलियां दी जाएं।”

यह सुनकर रावण हंस पड़े, “वाह, वैद्यराज! अब तो सभी सिरों को बराबर न्याय मिलेगा।”

वैद्यराज ने दवा का पैकेट खोला, जिसमें ठीक 10 गोलियां थीं। उन्होंने एक-एक गोली सभी सिरों को दी और चमत्कार देखिए—कुछ ही देर में रावण का सिरदर्द गायब हो गया!

तभी से, जब भी कोई दवा बनती है, उसकी पैकिंग में 10 गोलियां रखी जाती हैं—ताकि अगर कभी कोई “दस सिर वाला” ग्राहक आ जाए, तो वह भी न्याय से वंचित न रहे!

और इस तरह, दवा के पैकेट में 10 गोलियों की परंपरा शुरू हुई!

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"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

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